
गोरखपुर, 5 सितंबर । मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि शिक्षा में राजनीति नहीं होनी चाहिए और राजनीति के चश्मे से देखने वालों को 2017 के बाद प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में आया आमूलचूल परिवर्तन दिखाई नहीं देगा।योगी शनिवार को शिक्षक दिवस पर बेसिक और माध्यमिक शिक्षा के उत्कृष्ट शिक्षकों को राज्य अध्यापक पुरस्कार एवं मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार वितरित करने के बाद उपस्थित शिक्षकों व अन्य जन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने प्रदेशभर के शिक्षकों का आह्वान किया कि वे शिक्षा व्यवस्था में उत्कृष्टता और नवाचार को लेकर स्वस्थ प्रतिस्पर्धा आगे बढ़ाएं। यही स्वस्थ प्रतिस्पर्धा प्रदेश और देश का भविष्य बनाएगी।
मुख्यमंत्री गोरखपुर के योगिराज बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में आयोजित समारोह में बेसिक शिक्षा विभाग के 61 और माध्यमिक शिक्षा विभाग के 20 शिक्षकों (कुल 81) को पुरस्कृत किया गया। सभी शिक्षकों को मुख्यमंत्री ने अपने हाथों से पुरस्कृत किया। शिक्षकों को पुरस्कार देते समय सीएम योगी ने उनसे आत्मीय संवाद कर बधाई दी और उन्हें खूब प्रोत्साहित भी किया।इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने विगत साढ़े नौ साल में शिक्षा व्यवस्था में आए सकारात्मक परिवर्तन की विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि बेसिक और माध्यमिक शिक्षा व्यवस्था में सुदृढ़ता लाने के काम वर्ष 2017 से पहले भी हो सकते थे। पर, तबकी सरकारों ने ध्यान नहीं दिया। उन्होंने किसी का नाम लिए बिना तंज कसा, ‘जितना पैसा आप सैफई महोत्सव में खर्च करते थे, उसी पैसे में से थोड़ा सा पैसा शिक्षा की तरफ डाइवर्ट करते तो लाखों बच्चों का भविष्य बन चुका होता। जितना पैसा वर्किंघम की बग्गी मंगा कर अपना जन्मदिन मनाते थे, उतना पैसा शिक्षा पर खर्च करते, तो बच्चों का भविष्य बनता, पहचान का संकट नहीं आता।’
मुख्यमंत्री ने शिक्षा पर राजनीति करने वालों पर प्रहार करते हुए कहा कि चुनावी घोषणा अलग विषय है। पर स्मार्ट क्लास, डिजिटल लाइब्रेरी बनाना कठिन कार्य होता है और यह प्रदेश के अंदर आज दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि बयान देना आसान है, लेकिन एक करोड़ 60 लाख बच्चों के अकाउंट में डीबीटी के माध्यम से पैसा पहुंचा देना कठिन कार्य है और वह कार्य हुआ है। संस्कृत के छठी क्लास से लेकर के आचार्य तक बच्चों को स्कॉलरशिप के साथ जोड़ देना कठिन कार्य था मगर सरकार ने वह भी किया। प्रोजेक्ट अलंकार जैसे इनोवेशन के माध्यम से, ऑपरेशन कायाकल्प के माध्यम से, बेसिक हो या माध्यमिक इन विद्यालयों में परिवर्तन का निर्णय करना कठिन था और इसे भी किया गया।उन्होंने कहा कि टिप्पणी करना आसान काम है लेकिन करके दिखाना मुश्किल। सीएम योगी ने यूपी को बदनाम करने के लिए दुष्प्रचार की तरफ भी ध्यान आकृष्ट कराया। कहा कि दूसरे राज्य के एक जर्जर विद्यालय भवन का वीडियो झांसी का बताकर चलाया जा रहा था। यूपी के शिक्षा जगत को अपमानित करने का प्रयास करने वालों को स्मार्ट क्लास, ऑपरेशन कायाकल्प जैसे व्यापक परिवर्तन दिखाई नहीं देता। मुख्यमंत्री ने शिक्षकों से अपील की कि हमारी प्रतिस्पर्धा चुनावी घोषणाबाजों से नहीं है। चुनावी उड़ानों पर बैठे लोगों की बजाय हमारी प्रतिस्पर्धा समय से है। उन्होंने कहा कि जिस बच्चे को आज आप पढ़ा रहे हैं, अगर आज आप चूक गए तो उसका बचपन दोबारा नहीं आने वाला है। इसलिए समय के साथ सही दिशा में, सही समय पर निर्णय लेने की आदत होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा के प्रति विश्वास को बनाए रखना सरकार और शिक्षकों की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि बदलती टेक्नोलॉजी पर हम मौन नहीं बने रह सकते। हमें एआई, रोबोटिक और ड्रोन टेक्नोलॉजी के अनुरूप खुद को तैयार करने की जरूरत है।
सपा का नाम लिए बगैर मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन लोगों को प्रदेश में चार बार शासन करने का अवसर मिला वह और जिस कांग्रेस को लगभग छह दशक तक यूपी में शासन करने का अवसर प्राप्त हुआ था, वह दोनों प्रदेश की बदलती व्यवस्था पर प्रश्न खड़ा करने का फिर से प्रयास कर रहे हैं। उनके स्वयं के स्मारक बने जर्जर भवन जिनको हम रिप्लेस कर चुके हैं, वे शिक्षा व्यवस्था पर प्रश्न खड़ा करने का प्रयास कर रहे हैं।