
लखनऊ, 5 सितंबर । कांग्रेस ने जातिगत जनगणना के मौजूदा प्रारूप को दोषपूर्ण बताते हुए केंद्र सरकार से इसकी प्रश्नावली रद्द कर प्रमाणित जातियों की सूची के आधार पर नए सिरे से प्रश्नावली तैयार करने की मांग की है।पार्टी ने आरोप लगाया कि मौजूदा प्रारूप में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की जातियों और उपजातियों की प्रमाणित सूची शामिल नहीं किए जाने से जातियों की वास्तविक संख्या सामने नहीं आ पाएगी और इसका सबसे अधिक नुकसान ओबीसी, अति पिछड़े वर्ग तथा वंचित समुदायों को होगा।
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी पिछड़ा वर्ग विभाग के चेयरमैन डॉ. अनिल जयहिंद ने शनिवार को प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में यह बातें कहीं। उन्होंने कहा कि सही गिनती, सही आंकड़े, सही हिस्सेदारी और सामाजिक न्याय के लिए जातिगत जनगणना का सटीक होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि मौजूदा प्रारूप में खुले विकल्प के जरिए जाति की जानकारी दर्ज करने का प्रावधान है, जबकि इसकी जगह प्रमाणित जातियों की सूची होनी चाहिए।जयहिंद ने कहा कि खुले प्रारूप में नागरिक अपनी जाति या उपजाति का नाम बताएगा और गणनाकार उसे उसी तरह दर्ज करेगा। भारत में एक ही जाति अलग-अलग क्षेत्रों में अलग नामों, उपजातियों, स्थानीय बोलियों और वर्तनी के साथ जानी जाती है। ऐसे में एक ही जाति के कई नाम दर्ज होने से आंकड़ों में भारी विसंगति पैदा हो सकती है।
उन्होंने कहा कि प्रश्नावली में पिछड़ा वर्ग शब्द तक शामिल नहीं है। ऐसी स्थिति में देश में ओबीसी की वास्तविक आबादी का सही आंकड़ा सामने आना मुश्किल होगा। अलग-अलग नाम और वर्तनी के कारण एक ही जाति कई हिस्सों में बंट गई तो ओबीसी और अति पिछड़े वर्ग की वास्तविक आबादी तथा उनकी सामाजिक-आर्थिक वंचना का सही आकलन नहीं हो सकेगा।कांग्रेस नेता ने कहा कि विश्वसनीय आंकड़ों के अभाव में यह तय करना भी कठिन होगा कि किन ओबीसी और अति पिछड़ी जातियों को आरक्षण का लाभ नहीं मिल पा रहा है। शिक्षा, छात्रवृत्ति, कौशल विकास, सरकारी रोजगार और कल्याणकारी योजनाओं में लक्षित हिस्सेदारी तय करने के साथ ही विभिन्न संस्थानों में इन वर्गों की वास्तविक भागीदारी का आकलन भी प्रभावित होगा।
उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों के पास बड़ी संख्या में जातियों की सूचियां पहले से उपलब्ध हैं। इसके बावजूद राष्ट्रव्यापी जातिगत जनगणना में प्रमाणित सूची को शामिल नहीं किया जा रहा है। उन्होंने सवाल किया कि जब ऐसी सूची उपलब्ध है तो उसका इस्तेमाल क्यों नहीं किया जा रहा है और पिछड़े वर्गों की जातियों की सूची को प्रक्रिया से बाहर रखने का फैसला किसके निर्देश पर हुआ।जयहिंद ने कहा कि कांग्रेस की मांग है कि मौजूदा प्रश्नावली को रद्द कर तेलंगाना और बिहार में अपनाई गई पद्धति के अनुरूप प्रमाणित जातियों की सूची के आधार पर नई प्रश्नावली तैयार की जाए। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों, विशेषज्ञों और जनता से व्यापक विचार-विमर्श के बाद ही नई प्रश्नावली तैयार होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस लंबे समय से सही तरीके से जातिगत जनगणना कराने की मांग करती रही है। पार्टी के अनुसार, 2021 से लंबित इस मांग को लेकर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी लगातार आवाज उठाते रहे हैं।जयहिंद ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी ने 20 अगस्त को प्रधानमंत्री को संयुक्त पत्र भेजकर मौजूदा प्रक्रिया पर आपत्ति जताई थी। इससे पहले खरगे ने अप्रैल 2023 और मई 2025 में भी इस संबंध में पत्र लिखे थे। जयहिंद ने कहा कि सरकार के पास अभी भी प्रारूप में आवश्यक सुधार करने का समय है, क्योंकि जातिगत जनगणना का काम फिलहाल सीमित क्षेत्रों में शुरू हुआ है और फरवरी 2027 से इसे देशभर में शुरू किया जाना है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने कमियों को दूर नहीं किया तो कांग्रेस देशव्यापी आंदोलन करेगी।
इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के लिए अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के प्रभारी एवं पूर्व मंत्री राजेंद्र पाल गौतम ने कहा कि मौजूदा आवेदन प्रपत्र में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की उपजातियों का उल्लेख है, लेकिन ओबीसी वर्ग के लिए ऐसी सूची उपलब्ध नहीं है।उन्होंने कहा कि इससे देश की बड़ी आबादी स्वयं को ठगा हुआ महसूस कर रही है। गौतम ने कहा कि यदि केंद्र सरकार ने जातिगत जनगणना के प्रारूप की कमियों को दूर नहीं किया तो कांग्रेस आने वाले समय में देशव्यापी आंदोलन करेगी।
संवाददाता सम्मेलन में सांसद राकेश राठौर, पिछड़ा वर्ग विभाग के चेयरमैन मनोज यादव, प्रवक्ता डॉ. उमाशंकर पाण्डेय, प्रियंका गुप्ता, रफत फातिमा, सचिन रावत और अलीमुल्ला खान सहित अन्य नेता मौजूद रहे।